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MAY PEACE BE UPON YOU

2/01/2010

आज साला फिर गिरना पड़े गा

एक दिन सरदार जी रोज़ कि तरह घर से बाहर निकले तो देखा कि रस्ते में केले का छिलका पड़ा हुआ है!
उन्हों ने बड़े अफ़सोस से कहा "आज साला फिर गिरना पड़े गा"

बलि-बलि जाऊँ

भारत पै सैयाँ मैं बलि-बलि जाऊँ
बलि-बलि जाऊँ हियरा लगाऊँ
हरवा बनाऊँ घरवा सजाऊँ
मेरे जियरवा का, तन का, जिगरवा का
मन का, मँदिरवा का प्यारा बसैया
मैं बलि-बलि जाऊँ
भारत पै सैयाँ मैं बलि-बलि जाऊँ

भोली-भोली बतियाँ, साँवली सुरतिया
काली-काली ज़ुल्फ़ोंवाली मोहनी मुरतिया
मेरे नगरवा का, मेरे डगरवा का
मेरे अँगनवा का, क्वारा कन्हैया
मैं बलि-बलि जाऊँ
भारत पै सैयाँ मैं बलि-बलि जाऊँ


रचनाकार: श्रीधर पाठक